Wednesday, April 8, 2015

जीनत अमान ता तुम भी नहीं हो
हमसे कहे राजेश खन्ना बनने का उम्मीद कइले हो

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लाइन मिलना कपिटलिस्टिक समाज का उँडेरकररेंट है।
जब आप रिलेशनशिप को एक लिमिटेड कमोडिटी बना देते हैं तो लाइन मिलना एक घटना हो जाती है
ज़िंदगी में होना और घटना का फ़र्क़ सामाजिक क्रिया है।

a tragedy is always first a tragedy and then a farce

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