सुधिजन
बहोत टेम हो गया गलचाद्दर किये हुए तो आदतन फिर से वापस हैं
कहानी टोहियाने का बहुत कोसिस किये हैं , जो हाथ लगा है उसमें से एक एक कर के बतावेंगे
पहिला है पाठक जी का लघुशंका
तो पाठक जी हमारे पुराने मित्र हैं कालेज के. जिला बेगुसराई के रहवासी हैं. हम सब से उम्र में बूढ़. मोच तोच पका के आये थे कॉलेज। १स्त ईयर का हॉस्टल था और फ्लोर के दुन्नो तरफ बाथरूम उथरूम था जिसका लाइट लड़का लोग होली में फोड़ दिया था। पाठक अँधेरा से डरते थे और हॉस्टल में ऐसा प्राणी का लोग खोज में रहता है। गए एक दिन पाठक जी रतिया में हगने की कवनो एक बाल्टी पानी उनका उपरे उझल दिया। जब तक पाठकजी धोती टोटी समेत के बहार निकलते तब तक मुलजिम फरार।
उस दिन के बाद से पाठक जी रात में हगने मूतने के लिए कंपनी खोजने लगे। कुछ दिन आदमी प्रतिष्ठा में प्राण गवाया उसका बाद गरियावे लगा पाठक जी के। " माउग हैं का महराज", "इतना का फट ता है" बोल बोल के पब्लिक लेवे लगा। पाठक जी हिचकने लगे औ फिर केकरो बोलना तोलना बंद कर दिए। करे का फिर। सामने एक ठो बंगलिआ के रूम था। नाम सोमक। रात में ओक्कर रूम के सामने पाठक जी मूत के काम चला लेते थे। सोमकवा भोरे भोरे दरवजवा खोले की मारे भभका। एक दिन सोमकवा के झाँट झरकिस औ बोला के सल्ला रात भर जगल रहेंगे औ खोजेंगे के कौन बहिँचो हमर दरवाजा पर मूत के जाता है। रतिया हुआ लाइट गुल। पाठक जी उठे दरवाजा खोले, धोतियाँ हटाये बस की इतना में दरवाजा खुला औ सोमकवा सामने। धरा पाठकवा के औ जड़ दिहिस। पाठक गड़बड़ाये औ पब्लिक के जमा किये। एसोसिएशन के सब थो नेता लोग जैम गिया। फैसला हुआ की मार किया जाये। मार कम हुआ बकैती जादे हुआ। बर्डेन पुलिस बोलाइस आ पुलिस दुन्नो साइड पब्लिक का धरा औ थाना ले गया। पब्लिक साझा सुलह किआ, झुट्ठो के गाला टला मिला औ चंदा उन्दा कर के गया छोडाबे। आदमी लोग आया , सब का फ़ोन टन पर्स तरस पुलिस रख लिहिस था। मीटिंग बैठा और पाठक के चेता दिया गया की सेल आप केकरो दरवजवा पर ऐसेही जा के मूत नहीं सकते हैं।
फिर से बहिँचो स्क्वायर वन. मूता किधर जाये।
बस आज इतने है। . डेरा जाइये अगला पार्ट बाद में सुनाबेंगे।
बहोत टेम हो गया गलचाद्दर किये हुए तो आदतन फिर से वापस हैं
कहानी टोहियाने का बहुत कोसिस किये हैं , जो हाथ लगा है उसमें से एक एक कर के बतावेंगे
पहिला है पाठक जी का लघुशंका
तो पाठक जी हमारे पुराने मित्र हैं कालेज के. जिला बेगुसराई के रहवासी हैं. हम सब से उम्र में बूढ़. मोच तोच पका के आये थे कॉलेज। १स्त ईयर का हॉस्टल था और फ्लोर के दुन्नो तरफ बाथरूम उथरूम था जिसका लाइट लड़का लोग होली में फोड़ दिया था। पाठक अँधेरा से डरते थे और हॉस्टल में ऐसा प्राणी का लोग खोज में रहता है। गए एक दिन पाठक जी रतिया में हगने की कवनो एक बाल्टी पानी उनका उपरे उझल दिया। जब तक पाठकजी धोती टोटी समेत के बहार निकलते तब तक मुलजिम फरार।
उस दिन के बाद से पाठक जी रात में हगने मूतने के लिए कंपनी खोजने लगे। कुछ दिन आदमी प्रतिष्ठा में प्राण गवाया उसका बाद गरियावे लगा पाठक जी के। " माउग हैं का महराज", "इतना का फट ता है" बोल बोल के पब्लिक लेवे लगा। पाठक जी हिचकने लगे औ फिर केकरो बोलना तोलना बंद कर दिए। करे का फिर। सामने एक ठो बंगलिआ के रूम था। नाम सोमक। रात में ओक्कर रूम के सामने पाठक जी मूत के काम चला लेते थे। सोमकवा भोरे भोरे दरवजवा खोले की मारे भभका। एक दिन सोमकवा के झाँट झरकिस औ बोला के सल्ला रात भर जगल रहेंगे औ खोजेंगे के कौन बहिँचो हमर दरवाजा पर मूत के जाता है। रतिया हुआ लाइट गुल। पाठक जी उठे दरवाजा खोले, धोतियाँ हटाये बस की इतना में दरवाजा खुला औ सोमकवा सामने। धरा पाठकवा के औ जड़ दिहिस। पाठक गड़बड़ाये औ पब्लिक के जमा किये। एसोसिएशन के सब थो नेता लोग जैम गिया। फैसला हुआ की मार किया जाये। मार कम हुआ बकैती जादे हुआ। बर्डेन पुलिस बोलाइस आ पुलिस दुन्नो साइड पब्लिक का धरा औ थाना ले गया। पब्लिक साझा सुलह किआ, झुट्ठो के गाला टला मिला औ चंदा उन्दा कर के गया छोडाबे। आदमी लोग आया , सब का फ़ोन टन पर्स तरस पुलिस रख लिहिस था। मीटिंग बैठा और पाठक के चेता दिया गया की सेल आप केकरो दरवजवा पर ऐसेही जा के मूत नहीं सकते हैं।
फिर से बहिँचो स्क्वायर वन. मूता किधर जाये।
बस आज इतने है। . डेरा जाइये अगला पार्ट बाद में सुनाबेंगे।
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