जब ज़मीन खिसकी तो लगा के शायद आसमान पे पाँव रख कर चल लेंगे। वो न हुआ। नयी ज़मीन कहाँ से खोजी जाये। पीछे मुड़ने का रास्ता खुला है मगर वहां से भाग कर जो इतनी दूर आया उसका हासिल? आगे खुला मैदान है , कोई रास्ता होता तो पकड़ कर चल भी लेता।
माज़ी चीज़ बुरी है।
एक पूरी दुनिआ होती है उसके अंदर।
नींद की तरह।
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मैं सपना देखना चाहता हूँ
एक नयी सुबह का
जब मैं सब कुछ पहली बार देख पाउँगा।
माज़ी चीज़ बुरी है।
एक पूरी दुनिआ होती है उसके अंदर।
नींद की तरह।
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मैं सपना देखना चाहता हूँ
एक नयी सुबह का
जब मैं सब कुछ पहली बार देख पाउँगा।
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