Sunday, September 6, 2015

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अपने बचपन से पीछा छुड़ाए बिना वयस्क होना मुश्किल है
जो अपने घर से भागता है
बेहतर बड़ा होता है
जो घर कंधे पर लिए घूमता है
उसके लिए हर इंसान में अपना कोई रिश्तेदार अटका पड़ा होता है


आपका कल, आपका माज़ी कई सौ सालों का है
आपका आज उसकी छाया  में सहमा पड़ा बैठा है
उसको पास बिठाओ और बोलो दोस्त

भागो , इस छाया के बाहर  बहुत बड़ी दुनिया है. 

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