Saturday, July 18, 2015

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ट्रैन का दरवाज़ा खुलता है
और जैसे घुटे हुए फेफड़े में सांस भरती है
ऐसे भक्क से भीड़ घुस जाती है

बुढऊ लोग कोना वाला सीट पे सेट हो जाता है
कपल लोग स्टील वाला खम्भा के एन्ने ओन्ने घुमते रहता है

खियाइल मजदूर लोग झोला उला में ड्रिल मशीन डाले
बंद चेहरा से फ़ोन तलाशता है
गाना ऊना खोजता है

लोहे के रेल पर फिसलते डब्बे में
अलग अलग कोने में
आदमी लोग अपना अपना घर खोज लेता है

किनारे में जम जाता है आदमी लोग धूल मिटटी के जैसा 

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