झूलों में बच्चे देखने का मन है।
चक्कर खाते , लकड़ी के घोड़ों पे उचकते बच्चे।
मेले देखने का मन है जहाँ काफी बालहठ के बाद
निशाने वाले की दुकान पर
या चाटवाले के पास
सुख कई शक्लों में मिलता था
चक्कर खाते , लकड़ी के घोड़ों पे उचकते बच्चे।
मेले देखने का मन है जहाँ काफी बालहठ के बाद
निशाने वाले की दुकान पर
या चाटवाले के पास
सुख कई शक्लों में मिलता था